Category: Gita's Motivation for Overcoming Self-Doubt
Discover motivational verses from Bhagavad Gita to overcome fear, anxiety, and stand up to challenges.
Bhagavad Gita 14.15
Sanskrit Shloka
रजसि प्रलयं गत्वा कर्मसङ्गिषु जायते |
तथा प्रलीनस्तमसि मूढयोनिषु जायते ||१४-१५||
Hindi Meaning: रजोगुण के प्रवृद्ध काल में मृत्यु को प्राप्त होकर कर्मासक्ति वाले लोक में वह जन्म लेता है तथा तमोगुण के प्रवृद्धकाल में मूढ़योनि में जन्म लेता है।।
English Meaning: When Passion prevails, the soul is reborn among those who love activity; when Ignorance rules, it enters the wombs of the ignorant.
Aaj Ki Shiksha (Today's Lesson)
पूर्वोक्त सिद्धांत के अनुसार ही मरणकाल में रजोगुण के आधिक्य के प्रभाव से जीव कर्मासक्त मनुष्य लोक में जन्म लेता है। उसके लिए कर्म करने और फल भोगने के लिए यही अत्यन्त उपयुक्त क्षेत्र है।
When Passion prevails, the soul is reborn among those who love activity; when Ignorance rules, it enters the wombs of the ignorant।
Previous Gita's Motivation for Overcoming Self-Doubt
Bhagavad Gita 15.1
यह श्लोक हमें कठोपनिषद् में वर्णित अश्वत्थ वृक्ष का स्मरण कराता है। वहाँ संसार वृक्ष का केवल निर्देश किया गया है।
Bhagavad Gita 14.5
गुण शब्द अध्यात्मशास्त्र की पारिभाषिक शब्दावली का होने के कारण उसका किसी अन्य भाषा में अनुवाद करना कठिन है। विशेषकर अंग्रेजी में उसका समानार्थी कोई शब्द नहीं है।
Bhagavad Gita 11.28
समुद्र से मिलन के लिए आतुर। उसकी ओर वेग से बहने वाली नदियों की उपमा इस श्लोक में दी गई है।
Bhagavad Gita 12.6
See Commentary under।
Bhagavad Gita 2.42
कल्याणकारी मार्ग पर आगे बढ़ें; अपने कर्तव्य पथ पर सदा स्थिर रहें।
Bhagavad Gita 1.23
पूर्व श्लोक में कही गयी बात को ही अर्जुन इस श्लोक में बल देकर कह रहा है। शत्रु सैन्य के निरीक्षण के कारण को भी वह यहाँ स्पष्ट करता है।