श्रीमद्भगवद गीता

Daily Bhagavad Gita Quotes Archive

Each daily quote has its own page with Sanskrit, Hindi meaning, English explanation, and a short practical teaching.

July 21, 2026

Aaj Ki Shiksha: Bhagavad Gita 3.14

कल्याणकारी मार्ग पर आगे बढ़ें; अपने कर्तव्य पथ पर सदा स्थिर रहें।

July 20, 2026

Aaj Ki Shiksha: Bhagavad Gita 6.14

कुछ काल तक ध्यान का निरन्तर अभ्यास करने के फलस्वरूप साधक को अधिकाधिक शांति और सन्तोष का अनुभव होता है अत्यन्त सूक्ष्म आन्तरिक शांति को प्राप्त पुरुष को यहाँ प्रशान्तात्मा कहा गया है। आत्मा को अपने शुद्ध और दिव्य स्वरूप में व्यक्त होने के लिए प्रशान्त अन्तकरण ही अत्यन्त उपयुक्त माध्यम है।

July 19, 2026

Aaj Ki Shiksha: Bhagavad Gita 1.42

अब अर्जुन वर्णसंकर के दुष्परिणामों को बताता है। जातियों के वर्णसंकर होने से अन्तर्बाह्य जीवन में नैतिक मूल्यों का ह्रास होता है और फलत परिवारिक व धार्मिक परम्परायें नष्ट हो जाती हैं।

July 18, 2026

Aaj Ki Shiksha: Bhagavad Gita 10.8

व्यष्टि और समष्टि में जो भेद है वह उन उपाधियों के कारण है। जिनके माध्यम से एक ही सनातन।

July 17, 2026

Aaj Ki Shiksha: Bhagavad Gita 2.52

मोह निवृत्ति होने पर वैराग्य प्राप्ति का आश्वासन यहाँ अर्जुन को दिया गया है। श्रोतव्य शब्द से तात्पर्य उन सभी विषयोपभोगों से है जिनका प्रत्यक्ष अनुभव नहीं किया गया है तथा श्रुत शब्द से सभी ज्ञान अनुभव सूचित किये गये हैं।

July 16, 2026

Aaj Ki Shiksha: Bhagavad Gita 18.75

महाभारत युद्ध के प्रारम्भ होने के पूर्व। महर्षि व्यास जी ने धृतराष्ट्र को दिव्य दृष्टि का वरदान देने की अपनी इच्छा प्रकट की थी।

July 15, 2026

Aaj Ki Shiksha: Bhagavad Gita 6.23

इन चार श्लोकों में योग की स्थिति का सम्पूर्ण वर्णन करते हुये भगवान् सब का आह्वान करते हैं कि इस योग का अभ्यास निश्चयपूर्वक करना चाहिये। इस मार्ग पर चलने के लिये सबको उत्साहित करने के लिए भगवान् योगी को प्राप्त सर्वोत्तम लक्ष्य का भी वर्णन करते हैं।

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